हमारा मन दो भागों में बंटा होता है, चेतन और अवचेतन, चेतन मन वह है जो निर्णय लेता है, सोचता है और समझता है, लेकिन अवचेतन मन, जो हमारे व्यवहार, आदतों, भावनाओं और विश्वासों को नियंत्रित करता है, कहीं अधिक शक्तिशाली होता है, इसलिए इस बात का आपको पता होना बहुत जरूरी है, की अवचेतन मन को रिप्रोग्राम कैसे करे
अगर आप अपने जीवन को किसी भी दिशा में बदलना चाहते हैं, चाहे वह सफलता हो, आत्मविश्वास हो, आदतें हो, या सोच का तरीका तो आपको अपने अवचेतन मन को रीप्रोग्राम करना होगा।
इसलिए इस पोस्ट में हम कुछ पॉइंट्स के माध्यम से विस्तार से जानेंगे कि अवचेतन मन क्या है, यह कैसे काम करता है, और अपने अवचेतन मन को रिप्रोग्राम कैसे करे, ओर इसकी वैज्ञानिक व व्यवहारिक विधियाँ कौन-सी हैं, इन सारी बातों को अच्छे से जानेंगे, तो आहिए शुरू करते है।

1. अवचेतन मन क्या है? इसे समझना क्यों जरूरी है
अवचेतन मन, हमारे दिमाग का वह एक अहम हिस्सा है जो:
- हमारे अनुभवों को जमा करता है
- हमारे दिमाग मे विश्वास और धारणाएं बनाता है
- हमारे रोजमर्रा के फैसले इसके ऊपर प्रभावित करता है
- बिना प्रयास के हमारी आदतों को नियंत्रित करता है
महत्व क्यों है?
यदि आपके अवचेतन दिमाग में यह बैठा है कि “मैं असफल हूं,” तो आप लाख प्रयास करें, लेकिन असफलता ही पाएंगे, वहीं अगर इसमें यह बसा है कि “मैं सक्षम हूं,” तो बाधाएं भी आपका रास्ता नहीं रोक पाएंगी।
इसलिए अवचेतन मन को सही दिशा में ढालना अनिवार्य है।
2. अवचेतन मन को कैसे प्रोग्राम किया जाता है?
हमारा अवचेतन मन उन सूचनाओं से प्रोग्राम होता है जो हम बार-बार सुनते, सोचते या अनुभव करते हैं, विशेष रूप से बचपन में।
उदाहरण:
- “पढ़ाई में कमजोर हो” – बार-बार सुनने से बच्चा यही मान लेता है।
- “तुम तो बहुत होशियार हो” – यह विश्वास अंदर बैठ जाता है।
इसी प्रकार, आप अपने वयस्क जीवन में भी कुछ अभ्यासों द्वारा अवचेतन मन में नए विचार और विश्वास भर सकते हैं।
3. आत्म-जागरूकता को विकसित करें
रीप्रोग्रामिंग का पहला कदम है, उसको पहचानना कि वर्तमान में आपका अवचेतन मन क्या मानता है।
यह कैसे करें?
- खुद से पूछें: “क्या मेरे भीतर नकारात्मक विश्वास हैं?”
- नोट करें कि आप किस स्थिति में खुद को रोकते हैं।
- यह देखें कि आपको कौनसा डर या संकोच है, जो आपकी प्रगति को रोक रहा हैं।
जैसे ही आप अपनी आंतरिक सीमाओं को पहचानते हैं, आप उन्हें बदलने की दिशा में आगे बढ़ सकते हैं।
4. सकारात्मक बातों को अपनाएं
हम अपने अवचेतन मन को सबसे ज़्यादा उसी समय प्रभावित करते हैं जब हम खुद से बात करते हैं।
इसके लिए क्या करें:
- हर सुबह खुद से कहें: “मैं योग्य हूं”, “मुझे सफलता मिल सकती है”, “मैं बदल सकता हूं।”
- नकारात्मक वाक्य जैसे – “मुझसे नहीं होगा”, “मैं डरता हूं” को पूरी तरह हटाएं।
- लिखित में प्रतिज्ञा करें और रोज़ दोहराएं।
इसके अलावा एक बात को हमेशा ध्यान रखना की हर शब्द एक बीज की तरह होता है, जिसमे आप जो बोएंगे, वही उपजेगा।
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5. विज़ुअलाइज़ेशन की शक्ति का उपयोग करें
विज़ुअलाइज़ेशन यानी अपनी आंखें बंद करके रखे, फिर खुद को उस स्थिति में देखे, जो चीज आप पाना चाहते हैं।
कैसे करें:
- रोज़ 10 मिनट एकांत में बैठें आंखें बंद करें।
- ऐसी कल्पना करें कि आप अपनी परीक्षा में टॉप कर रहे हैं, ओर अपना इंटरव्यू पास कर रहे हैं, या स्टेज पर बोल रहे हैं।
- उस दृश्य को महसूस करें, सुनें, देखें, और भावनाएं अनुभव करें।
अवचेतन मन कभी भी कल्पना और वास्तविकता के अंदर में फर्क नहीं करता है, जिसे विज़ुअलाइज़ेशन के माध्यम से आप उसे नए विश्वास दे सकते हैं।
6. प्रतिज्ञा लेखन – शब्दों से बदलाव
आपके द्वारा बार-बार लिखी गई बातें सीधे अवचेतन मन को प्रभावित करती हैं।
कैसे करें:
- रोज़ एक डायरी में 5-10 बार लिखें:
- “मैं आत्मविश्वासी हूं”
- “मेरे जीवन में सफलता निश्चित है”
- “मैं हर दिन बेहतर बन रहा हूं”
इस अभ्यास से धीरे-धीरे आपके अंदर नया विश्वास विकसित होगा।
7. मेडिटेशन और अल्फा स्टेट का महत्व
अवचेतन मन को रीप्रोग्राम करने के लिए सबसे प्रभावी समय होता है जब आपका मन अल्फा स्टेट में होता है, यानी नींद से पहले और सुबह उठने के तुरंत बाद।
इसके लिए क्या करें:
- हर सुबह उठने के 5 मिनट और सोने से पहले 5 मिनट ध्यान करें।
- ध्यान के दौरान सकारात्मक विचार दोहराएं।
- धीमी सांस लें, शरीर को ढीला छोड़ दें, और कल्पना करें कि बदलाव हो रहा है।
मेडिटेशन दिमाग को शांत करता है और अवचेतन मन को बदलाव के लिए तैयार करता है।

8. पुराने विश्वासों को चुनौती देना
आपका अवचेतन मन कई पुराने और झूठे विश्वासों पर आधारित हो सकता है, उन्हें बदलने के लिए जरूरी है कि आप उन्हें सवाल करें।
कैसे करें:
- उदाहरण: “मैं अच्छा वक्ता नहीं हूं” – क्या कभी आपने अभ्यास किया?
- “मैं कमजोर हूं” – क्या यह हर बार सही साबित हुआ?
- अपने पुराने अनुभवों को नए नजरिए से देखें।
जैसे ही आप इन विश्वासों को तर्क से चुनौती देते हैं, उनका असर कम होने लगता है।
9. प्रेरक सामग्री का नियमित सेवन
आप जो सुनते और देखते हैं, वही आपके अवचेतन मन को निर्देशित करता है।
क्या करें:
- मोटिवेशनल वीडियो, पॉडकास्ट, किताबें पढ़ें।
- नकारात्मक खबरों, शिकायतों और आलोचनाओं से दूर रहें।
- सफल लोगों की कहानियाँ पढ़ें – उनका संघर्ष और परिवर्तन आपको भी प्रेरित करेगा।
आपका वातावरण भी आपके अवचेतन मन को आकार देता है, उसे प्रेरक और सकारात्मक बनाएं।
10. अनुशासित दिनचर्या बनाएं – आदतों से बनता है मन
हर दिन के छोटे-छोटे कार्य भी आपके मन को रीप्रोग्राम करने में मदद करते हैं।
आदतें बनाएं:
- सुबह उठते ही खुद से सकारात्मक वाक्य कहें।
- व्यायाम करें – शरीर और मन दोनों सक्रिय रहते हैं।
- मोबाइल और टीवी से समय निकालकर खुद से जुड़ें।
11. ग्रेटफुलनेस प्रैक्टिस – आभार से जागरूकता बढ़ाएं
अवचेतन मन को शांत, विनम्र और सकारात्मक बनाए रखने के लिए आभार की भावना बेहद आवश्यक है।
कैसे करें:
- हर रात सोने से पहले 3 चीज़ों के लिए आभार लिखें।
- जैसे: “आज मेरा पढ़ाई में मन लगा, धन्यवाद।”
- “मुझे एक नया अवसर मिला, धन्यवाद।”
इससे आपका ध्यान कमी से हटकर उपलब्धियों पर केंद्रित होगा।
12. खुद को माफ करना सीखें
कई बार हमारा अवचेतन मन पिछली गलतियों, अपराधबोध या शर्म से भरा होता है, जब तक आप खुद को माफ नहीं करते, तब तक आप आगे नहीं बढ़ सकते।
फिर क्या करें:
- खुद से कहें: “मैंने जो किया, वह उस समय मेरी समझ थी।”
- “अब मैं बेहतर बनने की कोशिश कर रहा हूं, और मैं खुद को क्षमा करता हूं।”
माफी देने से अवचेतन मन हल्का होता है और नए विचारों के लिए जगह बनती है।
13. अपने आप को बार-बार सकारात्मक ढंग से दोहराएं
दिमाग की रीप्रोग्रामिंग करना कोई एक दिन का काम नहीं है, बल्कि यह एक प्रक्रिया है।
इसके लिए एक नियम बनाएं:
- प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट अपने अवचेतन मन को कार्य करने के लिए निर्धारित करें।
- यह आपकी दिनचर्या का हिस्सा बने।
- जैसे-जैसे आप अभ्यास करते रहेंगे, वैसा ही आपका व्यवहार और सोच बनती जाएगी।
14. अपने आसपास का माहौल बदलें
जैसा माहौल, वैसी सोच।
अगर आप हर समय नकारात्मक सोच रखने लोगों के बीच रहते है, तो आप एक आलोचना और तनाव से घिरे रहते हैं, तो यह तरीका आपके अवचेतन मन पर असर पड़ेगा।
फिर क्या करें:
- अपना समय सकारात्मक सोच वाले लोगों के बीच बिताएं।
- ऐसे ग्रुप्स या फोरम्स का हिस्सा बनें जहां आत्म-विकास की बातें होती हैं।
- घर में भी प्रेरक पोस्टर, उद्धरण या बोर्ड लगाएं।
15. धैर्य रखें
बहुत से लोग इसलिए बदल नहीं पाते है, क्योंकि वे परिणाम की जल्दी में होते हैं, लेकिन अवचेतन मन धीरे-धीरे बदलाव स्वीकार करता है।
इसके लिए याद रखें:
- नियमित अभ्यास से ही सफलता मिलेगी।
- छोटी-छोटी प्रगति मे भी जश्न मनाएं।
- खुद की तुलना किसी और से न करें, हर व्यक्ति की यात्रा अलग होती है।
निष्कर्ष
अवचेतन मन ही असली जीवन निर्देशक है।
अगर आप इसमें सकारात्मक, सशक्त और प्रेरक विचार भरते हैं, तो आपके निर्णय, व्यवहार और परिणाम अपने आप बदल जाते हैं।
“सोच को बदलो, जीवन अपने आप बदल जाएगा, इसलिए अपने अवचेतन मन को बदलो, वास्तविकता खुद बदल जाएगी।”
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